"फ़ोन फ्रेंड्स क्लब-दोस्ती कम, अश्लील बातें ज्यादा"
आज अपनी पत्नी द्वारा फर्जी मुकद्दमों के कारण मानसिक "डिप्रेशन" की बीमारी के अलावा अनेकों बिमारियों की वजय से कुछ अच्छी रचनाएँ /लेख नहीं लिख/कह पाता हूँ. न्याय व्यवस्था के अधिकारियों द्वारा अपना कर्तव्य व फर्ज ईमानदारी से नहीं निभाने के कारण कैसे मेरा जीवन और भविष्य लगभग चौपट हो गया है. इसलिए अपने ब्लॉग पर भी नियमित रूप से पोस्ट नहीं लिख पाता हूँ. मगर अपने "सच्चा दोस्त बनो और सच्चा दोस्त बनाओ" अभियान के तहत दोस्तों की मदद मिलने के बाद अपनी खोजी पत्रकारिता के अनुभव से एक लेख "फ़ोन फ्रेंड्स क्लब-दोस्ती कम, अश्लील बातें ज्यादा" मैंने मासिक पत्रिका "गृहलक्ष्मी" के लिए सन 2001 लिखा था. लेख प्रकाशित होने के 60 दिन बाद ही लेख में जिक्र सामाजिक समस्या का निवारण करते हुए सरकार ने ऐसे फ़ोन लाईन को बंद कर दिया था. जिससे युवा पीढ़ी पर दुष्प्रभाव पड़ रहा था. जिसे पत्रिका ने अपने टाईटल (शीर्षक) पेज पर भी प्रमुख्यता से प्रकाशित किया था. उम्मीद है आपको उपरोक्त लेख जरुर पसंद आयेगा. अगर आपके पास समय हो तो कृपया किल्क करके संलग्न लेख "फ़ोन फ्रेंड्स क्लब-दोस्ती कम, अश्लील बातें ज्यादा" जरुर पढ़ें.


